रात 2:00 AM का सचदिन में मैं बहुत हँसता हूँ। ऑफिस में सब कहते हैं – "कितना जोकर है ये।" रात 2 बजे मोबाइल नीचे रखता हूँ, और आईने में अपना चेहरा देखता हूँ – वहाँ कोई जोकर नहीं होता। बस एक औरत है जिसने चार साल पहले कहा था

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 दिन में मैं बहुत हँसता हूँ। ऑफिस में सब कहते हैं – "कितना जोकर है ये।" रात 2 बजे मोबाइल नीचे रखता हूँ, और आईने में अपना चेहरा देखता हूँ – वहाँ कोई जोकर नहीं होता। बस एक औरत है जिसने चार साल पहले कहा था – "मैं तुमसे प्यार करती हूँ", और फिर बिना मतलब के चली गई। अब उसके कहने को तो कुछ नहीं, पर उसने जो खालीपन छोड़ा है, वो रात 2 बजे बोलता है – "आगे बढ़ जा।" मैं कहता हूँ – "कहाँ, जब मंजिल ही छीन ली?"

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