टूटा हुआ गिलासअब मैं उन टुकड़ों से अपनी उँगलियाँ काटता हूँ – ताकि दर्द शरीर का हो, दिल का नहीं।


 तुमने जाते हुए वो गिलास गिरा दिया था – जिससे तुम पानी पिया करते थे। मैंने उसके टुकड़े बिना छुए रख दिए। अब रोज़ सुबह उन टुकड़ों में अपना चेहरा देखता हूँ – बिखरा हुआ, उसी तरह जैसे मेरा दिल। कोई उन टुकड़ों को जोड़ने नहीं आया। न कोई गोंद लाया, न कोई चिपकाने वाला।I am sending you this app that you may be interested.


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