हर चुप्पी एक चीख़ है मैंने चुप रहना सीख लिया, पर हर चुप्पी के अंदर एक चीख़ दबी है।
लोग कहते हैं – "तुम बहुत शांत हो गए।" मैं मुस्कुरा देता हूँ। पर सच तो यह है कि अब शब्द बेकार हो गए हैं। जब सामने वाला सुनना ही नहीं चाहता, तो क्यों बोलें?
हर चुप्पी के अंदर एक चीख़ होती है – "मुझे समझो।" पर कोई नहीं समझता। इसलिए अब चुप रहना ही अपना दुश्मन बना लिया है।
चीख़ें अब सिर्फ रात के तकिए जानते हैं। दिन में तो बस एक मूक दर्शक हूँ।I am sending you this app that you may be interested.

Comments
Post a Comment
आपको यह पोस्ट कैसी लगी? हमें कमेंट में जरूर बताएं।"