वो दिन नहीं लौटतेमुस्कुराता हुआ

 

फोटो एलबम खोलता हूँ तो हँसी आती है – कैसे बेवजह खुश थे हम। अब वही लोग हैं, पर न साथ हैं, न वो बातें। समय ने धीरे-धीरे हर रिश्ते को एक सबक में बदल दिया।

तुम्हारी यादें अब बोझ नहीं, एक जुलूस है – जो हर रात निकलता है। मैं देखता रहता हूँ।

वो दिन नहीं लौटेंगे, मैं जानता हूँ। पर इन यादों की बारात में शामिल होने का मन तो करता है। बस अब तुम नहीं हो

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